ॐ राष्ट्राय स्वाहा -१

Om Rashtra Swaha-1

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 श्री गुरूजी एक प्रेरक जीवन कहानी  

‘ॐ राष्ट्राय स्वाहा’ उपन्यास श्रीगुरुजी के जीवन के साथ एकरूप-एकात्म होकर लिखा गया है| श्रीगुरुजी के व्यक्तित्व का आकलन करने के लिए उनका निकट का परिचय आवश्यक नहीं है | श्रीगुरुजी जैसे व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति के जीवन से घटना चक्र प्रभावित होते है | इस प्रकार के श्रेष्ठ व्यक्ति ही वर्तमान का निर्माण करते है | इनमे वर्तमान को उज्ज्वल भविष्य में परिवर्तित करने की भी क्षमता होती है | उनके जीवन विचार और कार्य के परिणाम के प्रकाश में ही उनके व्यक्तित्व का आकलन किया जा सकता है| श्रीमती मृणालिनी बाई ने अपनी सरल, समर्थ तथा ओजस्वी भाषा में यह एक दुष्कर कार्य संपन्न किया है |

Weight 168.00 g
Publisher

Suruchi Prakashan