Look Inside
Sale!

वे पंद्रह दिन

(1 customer review)

देश विभाजन के समय हमारे देश में लेखकों की कमी नहीं थी लेकिन उन्होंने इस अप्रिय सत्य की ओर से अपनी आँखे मूंदे रखी।
१९४७ के विभाजन की त्रासदी में, क्रूरता और बर्बरता के उस भयानक कालखंड में, अनेक सर्वसामान्य नागरिकों और स्वयंसेवकों ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए लाखों हिन्दू-सिख भाई-बहनों को पाकिस्तान से सुरक्षित भारत में पहुचाया।
०१ अगस्त १९४७ से १५ अगस्त १९४७ तक इन १५ दिनों में जो भी भीषण घटनाएँ हुई है उसका सत्य इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है।

200.00 180.00

8 in stock

SKU: 0a0547bd5787 Categories: , ,

उन पंद्रह दिनों के प्रत्येक चरित्र का, प्रत्येक पात्र का भविष्य भिन्न था! उन पंद्रह दिनों ने हमें बहुत कुछ सिखाया।
माउंटबेटन के कहने पर स्वतंत्र भारत में यूनियन जैक फहराने के लिए तैयार नेहरू हमने देखे। लाहौर अगर मर रहा है, तो आप भी उसके साथ मौत का सामना करो” ऐसा जब गांधीजी लाहौर में कह रहे थे, तब राजा दाहिर की प्रेरणा जगाकर, हिम्मत के साथ, संगठित होकर जीने का सूत्र’ उनसे मात्र 800 मील की दूरी पर, उसी दिन, उसी समय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्रीगुरुजी’ हैदराबाद (सिंध) में बता रहे थे।
कांग्रेस य की पत्नी सुचेता कृपलानी कराची में सिंधी महिलाओं को बता रही थी कि ‘आपके मैकअप के कारण, लो कट ब्लाउज के कारण मुसलिम गुंडे आपको छेड़ते हैं।
तब कराची में ही राष्ट्र सेविका समिति की मौसीजी हिंदू महिलाओं को संस्कारित रहकर बलशाली, सामर्थ्यशाली बनने का सूत्र बता रही थीं !
जहाँ कांग्रेस के हिंदू कार्यकर्ता, पंजाब, सिंध छोड़कर हिंदुस्थान भागने में लगे थे और मुसलिम कार्यकर्ता मुसलिम लीग के साथ मिल गए थे, वहीं संघ के स्वयंसेवक डटकर, जान की बाजी लगाकर, हिंदू सिखों की रक्षा कर रहे थे।
उन्हें सुरक्षित हिंदुस्थान में पहुँचाने का प्रयास कर रहे थे।
फर्क था, बहुत फर्क था-कार्यशैली में, सोच में, विचारों में सभी में।
स्वतंत्रता प्राप्ति 15 अगस्त, 1947 से पहले के पंद्रह दिनों के घटनाक्रम और अनजाने तथ्यों से परिचित करानेवाली पठनीय पुस्तक।

Weight 188.00 g
Language

Hindi

Pages

182

Binding

Paperback

Author

Prashant Pole

Publisher

Prabhat Prakashan

1 review for वे पंद्रह दिन

  1. Vikram Sharma

    स्वतंत्रता प्राप्ति 15 अगस्त, 1947 से पहले के पंद्रह दिनों के घटनाक्रम और अनजाने तथ्यों से परिचित करानेवाली पठनीय पुस्तक।

Add a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *