मुस्लिम शासक तथा भारतीय जन-समाज

Muslim Shashak Tatha Bharatiya Jan-Samaj

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मुस्लिम शासक तथा भारतीय जन-समाज

रुढ़िवादी मुसलमान ने सदैव यही अनुभव किया की वह भारत में रहता अवश्य है, परन्तु भारत का अविभाज्य अंग नहीं है | उसे अपने ह्रदय में “भारतीय परम्पराओं, भाषा और सांस्कृतिक वातावरण को अपनाने की बजाय उन्हें फारस और अरब से आयात करना अच्छा लगता है | भारतीय मुसलमान बौद्धिक दृष्टि से विदेशी थे | वे भारतीय पर्यावरण के अनुरूप ह्रदय को नहीं बना पाया|”

Weight 225.00 g
Publisher

Suruchi Prakashan