प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति

Prachin Bharatiya Siksha Paddhati

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प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति

अपने देश के सुदूर दक्षिण प्रान्त केरल में प्रतिदिन सूर्यास्त होते ही मंगलदीप घर के सामने की उपशाला में रखने की परम्परा है | इस पवित्र कर्म की अधिकारिणी घर की सुमंगली माता अथवा कन्या है | वह घर के अन्दर से जलाया दीपक शनैः शनैः बहार लाते-लाते मन्द स्वर में उच्चारती है- ”दीपम” | त्रिसंध्या की शुभवेला में दीपवन्दना के लिए घर के सभी जनों का ध्यान आकृष्ट करने हेतु यह किया जाता है| वह दीप स्वयं प्रकाशमान है | छा रहे अंधकार में उसका प्रकाश उसे देखने से पूर्व ही सबको पता चलना है, अर्थात् उसकी पूर्वघोषणा वाचा करने की आवश्यकता नहीं फिर भी की जाती है | उसी प्रकार है श्री लज्जाराम तोमर की लिखी इस स्वयं प्रकाशमान पुस्तक की प्रस्तावना | जिज्ञासुओं का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना ही इसका एकमात्र उद्देश्य है |

Weight 182.00 g
Publisher

Suruchi Prakashan