प्रकाशक : भारतीय शिक्षण मंडल

  

 
Our Book Price: R 25.00

For Printed Books: Minimum order size is Rs. 200. Orders less than Rs. 200 will not be processed online.
Generally delivered in 6- 8 business days.

परिवार बने पाठशाला  

 परिवार बने पाठशाला 

हमारी भारतीय संस्कृति में शिक्षा का प्रारंभ विद्यालय से नहीं, घर से ही होता है। मनुष्य का चरित्र निर्माण करनेवाली इस अनौपचारिक शिक्षा को संस्कार कहा जाता है। हमारे यहां आज भी मान्यता है कि संस्कारों का प्रारंभ जन्म से नहीं, गर्भ में ही शुरू हो जाता है। इसी कारण माता को प्रथम गुरु कहा जाता है। माता ही है जो बालक का पालन-पोषण के साथ ही संस्कारों का सिंचन भालकों में करती है। इस दृष्टि से माता का स्थान परिवार में सर्वोपरि है। इस पुस्तक में परिवार को आदर्श रूप में किस तरह से समाज में प्रस्थापित किया जा सकता है, इसका पाथेय प्रस्तुत है। भारतीय शिक्षण मंडल ने भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित परिवार व्यवस्था को केन्द्र में रखकर इस पुस्तक की रचना की है।

.

लेखक : मुकुल कानिटकर  

NA

अंतरंग

 अनुक्रमाणिका 

1) हिन्दू परिवार की संकल्पना 

2) भारतीय जीवन दृष्टि में महिला

Book details:

In Stock : 9
Pages : 42
ISBN No : 978-81-924111-6-3
Binding : Paper
Weight : 66 grams

Our Partners




Login Form
 
Username:
Password: