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१८५७ का स्वातन्त्र्य समर : एक पुनरावलोकन

Manufacturer: Itihas Sankalan Samiti
१८५७ का राष्ट्रीय संघर्ष विश्‍व के इतिहास में एक आश्‍चर्यचनक घटना तथा भारतीय इतिहास का एक उज्ज्वल तथा गौरवमयी पृष्ठ है| यह भारतीय इतिहास में प्रथम प्रयास था, जिसमें समूचे देश ने एकजूट हो विदेशी शक्ति को भारत से खदेड़ने का प्रयत्न किया| इस संघर्ष में सभी जातियों, धर्मों, सम्प्रदायों तथा वर्गों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया| किसी भी यूरोपियन साम्राज्य के इतिहास में इतना विशाल सैनिकों तथा नागरिकों का संघर्ष नहीं हुआ|  यह भी सत्य है कि ब्रिटिश तथा अधिकतर भारतीय इतिहासकारों ने इस महान घटना का सही सन्दर्भ में तथ्यों के आधार पर वर्णन नहीं किया है| भारतीय प्रबुद्धवर्ग तथा जन-मानस इसमें भ्रमित ही अधिक हुआ हैं| प्रस्तुत लघु ग्रन्थ में लेखक ने प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर देश की नवयुवक पीढ़ी को सही इतिहास से अवगत कराने का प्रयास किया है|
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१८५७ का राष्ट्रीय संघर्ष विश्‍व के इतिहास में एक आश्‍चर्यचनक घटना तथा भारतीय इतिहास का एक उज्ज्वल तथा गौरवमयी पृष्ठ है| यह भारतीय इतिहास में प्रथम प्रयास था, जिसमें समूचे देश ने एकजूट हो विदेशी शक्ति को भारत से खदेड़ने का प्रयत्न किया| इस संघर्ष में सभी जातियों, धर्मों, सम्प्रदायों तथा वर्गों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया| किसी भी यूरोपियन साम्राज्य के इतिहास में इतना विशाल सैनिकों तथा नागरिकों का संघर्ष नहीं हुआ| 

यह भी सत्य है कि ब्रिटिश तथा अधिकतर भारतीय इतिहासकारों ने इस महान घटना का सही सन्दर्भ में तथ्यों के आधार पर वर्णन नहीं किया है| भारतीय प्रबुद्धवर्ग तथा जन-मानस इसमें भ्रमित ही अधिक हुआ हैं| प्रस्तुत लघु ग्रन्थ में लेखक ने प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर देश की नवयुवक पीढ़ी को सही इतिहास से अवगत कराने का प्रयास किया है|

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